पी ए डी डी परियोजनाएं

1.भौगोलिक संकेत वाले उत्पादों के लिए स्वैच्छिक प्रमाणन योजना:

भौगोलिक संकेत (जिओग्रफ़िकल इंडिकेशन, जीआई) सामग्री देश की हमारी सामूहिक और बौद्धिक विरासत का हिस्सा है, जिसे संरक्षित रखने और बढ़ावा देने की आवश्यकता है। पीएडीडी ने उद्योग संवर्धन और आतंरिक व्यापार विभाग (डीआईपीपी), वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार को प्रयोग (पायलट) के रूप में 15 जीआई उत्पादों की संपूर्ण योजना दस्तावेज प्रस्तुत किया था। जिससे जीआई उत्पादों को बढ़ावा मिल सके, जो या तो कृषि-वस्तु या निर्मित वस्तुएं हैं |

शामिल किए गए कुछ जीआई वस्तुएँ निम्नवत हैं :  नासिक अंगूर, नागपुर संतरे, बंगाली रशोगुल्ला, कांगड़ा चाय, कश्मीरी पश्मीना, सेलम फैब्रिक, बनारसी गुलाबी मीनाकारी, बस्तर ढोकरा इत्यादि हैं।

मुख्य विशेषताएं: कृषि, खाद्य और वस्त्र (हस्तशिल्प) क्षेत्रों में जीआई के साथ 15 उत्पादों के प्रमाणन की योजना।

2. जीएलपी सेल - नेशनल जीएलपी   कंप्लायंस एंड मॉनिटरिंग अथॉरिटी (एनजीसीएमए)

नेशनल गुड लेबोरेटरी प्रैक्टिसेस कंप्लायंस मॉनिटरिंग अथॉरिटी (एनजीसीएमए) ने 31 दिसंबर 2013 को गुड लेबोरेटरी प्रैक्टिसेज (जीएलपी) सर्टिफिकेशन प्रोग्राम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए भारतीय गुणवत्ता परिषद के साथ समझौता ज्ञापन किया। इस क्षेत्र में भारत के दायित्वों को पूरा करने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा नेशनल जीएलपी कंप्लायंस एंड मॉनिटरिंग अथॉरिटी (एनजीसीएमए) की स्थापना की गई है। अधिक जानकारी के लिए आप विजिट कर सकते हैं : https://dst.gov.in/ngcma 

पीएडीडी, एनजीसीएमए के जीएलपी कार्यक्रम में सहायता करता है। उन्हें परिचालनात्मक सहायता देने के अलावा, पीएडीडी विभाग ने राष्ट्रीय जीएलपी कार्यक्रम, का प्रभाव विश्लेषण किया है, जिसे डीएसटी के सचिव और एनजीसीएमए के प्रमुख ने सराहा है।

इसके अतिरिक्त भारत के जीएलपी कार्यक्रम के संचालन में तेजी लाने के लिए, सभी अनुप्रयोगों को डिजिटल रूप से प्राप्त करने और इसे एक चरण में संसाधित करने के लिए नया वेब पोर्टल डिजाइन और कार्यान्वित किया गया है जहां सिफारिशें तकनीकी समिति के सामने रखी जाती हैं।

त्रुटि मुक्त समन्वय के लिए, सभी हितधारकों के मुद्दों को हल करने के लिए नियमित जॉइंट कोआर्डिनेशन कमिटी की बैठक और टेक्निकल  कमिटी की बैठक बुलाए जाते हैं। समय-समय पर परीक्षण सुविधाओं, सरकारी अनुसंधान संस्थानों और शिक्षाविदों के बीच संवेदीकरण कार्यशालाओं की एक श्रृंखला आयोजित की जाती है

3. आरपीएएसरिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम्स (ड्रोन्स) के लिए स्वैच्छिक प्रमाणन योजना:

नागर विमानन महानिदेशालय के साथ

क्यूसीआई ने 17 सितंबर 2020 को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए), नागरिक उड्डयन मंत्रालय, जो की आरपीएएस की नियामक संस्था भी हैं, के द्वारा विधिवत अनुमोदितरिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम (आरपीएएस)” के लिए प्रमाणन योजना शुरू की |

योजना को डीजीसीए आरपीएएस गाइडेंस मैनुअल और सिविल एविएशन  रिक्वायरमेंट्स (सीएआर) खंड 3 श्रृंखला X भाग I अंक I में निर्धारित तकनीकी आवश्यकताओं के अनुसार विकसित किया गया है। प्रमाणन सुनिश्चित करता है  कि आरपीएएस, आरपीएएस प्रमाणन योजना के प्रमाणन मानदंड के अनुसार आवश्यकताओं का पालन करता है।

यह योजना किसी भी आरपीएएस के लिए डीजीसीए से लाइसेंस/अनुमोदन प्राप्त करने के लिए अनिवार्य शर्त  है। इसमें उड़ान के दौरान सुरक्षा, संरक्षा और नो परमिशन और नो टेक ऑफ (एनपीएनटी) के अनुपालन का पता लगाने के लिए हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का परीक्षण शामिल है।

मुख्य विशेषताएं: नागरिक उपयोग के लिए ड्रोन के अनुमोदन के लिए विनियमन और आवश्यकताएं। आरपीएएस योजना को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए 8 प्रायोगिक परियोजना चल रहा हैं |

4.राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर):

क्यूसीआई को एनसीपीसीआर द्वारा भारतीय उद्योग और आपूर्ति श्रृंखला में बाल श्रम का पता लगाने के लिए सोशल  ऑडिट एजेंसियों को सूचीबद्ध करने का काम सौंपा गया था। पैनल में शामिल ऑडिट एजेंसियां, तथ्यों को स्थापित करने और मूल्यांकन अध्ययनों के दौरान पाए गए किसी भी गैर-अनुपालन को कम करने के लिए, बाल श्रम के प्रवण क्षेत्रों, उद्योगों, परिसरों से संबंधित स्वतंत्र मूल्यांकन अध्ययन आयोजित करेंगी। यह देश में बाल अधिकारों के संरक्षण के संबंध में सभी स्थापित मानदंडों के कल्याण और अनुपालन को सुनिश्चित करेगा।

सरकार का अंग होने के नाते एनसीपीसीआर केवल बाल अधिकारों के संरक्षण के संबंध में अनुपालन सुनिश्चित करके, बल्कि संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी भी सक्रिय रूप से करते हुए अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

इंडस्ट्री / कमोडिटी  बोर्ड्स / एक्सपोर्ट  प्रमोशन  कौंसिल्स के पत्र

मीडिया कवरेज​​​​​​

5.ग्लोबल टिम्बर फोरम - एसोसिएशन सर्वे फॉर नॉलेज:

लकड़ी आधारित उद्योग को समझने के लिए फ़ूड एंड  एग्रीकल्चर आर्गेनाइजेशन  (एफएओ) और वर्ल्ड  रिसोर्सेज  इंस्टिट्यूट (डब्ल्यूआरआई) के सहयोग से ग्लोबल टिम्बर फोरम (जीटीएफ) के लिए एक अध्ययन किया गया था। भारत में लकड़ी आधारित  उद्योग में चुनौतियों और अंतराल को समझने के लिए लकड़ी आधारित उद्योग के 10 संघों के साथ गहन साक्षात्कार आयोजित किए गए।

6. इंटरनेशनल ट्रॉपिकल टिम्बर आर्गेनाइजेशन (आईटीटीओ), जापान:

जापान स्थित अंतर सरकारी एजेंसी आईटीटीओ ने फर्नीचर उद्योग पर केंद्रित पूरे भारत में  धारणा सर्वेक्षण करने के लिए क्यूसीआई से संपर्क किया। इस गतिविधि में फ़र्नीचर निर्यात बढ़ाने के लिए मौजूदा पारिस्थितिकी तंत्र को समझने के लिए सरकारी और निजी संघों के साथ पारस्परिक विचार-विमर्श शामिल थी।

यह फर्नीचर उद्योग को समझने के लिए एक अध्ययन है, जो कि विशेष रूप से लकड़ी से बने फर्नीचर और जिन्हें लकड़ी के हस्तशिल्प फर्नीचर के रूप में वर्गीकृत किया गया है, उस पर आधारित हैं

संघों और समूहों जो कि लकड़ी के कच्चे माल से बने उत्पादों, जिसमें लॉग, सॉनवुड, मोल्डिंग, विनियर और प्लाईवुड शामिल हैं, विशेष रूप से विनिर्माण और खुदरा बिक्री, और बढ़ईगीरी (जॉइनरी) और इंजीनियर लकड़ी के उत्पाद शामिल हैं, संबद्ध हैं, पर ध्यान केंद्रित किया जाता है | 

परिकल्पित परिणाम वितरण चैनलों में प्रचलित मुद्दों और कच्चे माल के आयातकों सहित इस उद्योग में प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित करने वाले कारकों को संबोधित करेंगे जो व्यापारिक संबंधों पर एक बेहतर अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं।

7. कैपेसिटी  बिल्डिंग  कम  सेन्सिटिज़ेशन  (सीबी एंड एस) फॉर  वोलंटरी  सर्टिफिकेशन  स्कीम  फॉर  मेडिसिनल  प्लांट  प्रोडूस  (वीसीएसएमपीपी):

राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड, आयुष मंत्रालय ने वीसीएसएमपीपी योजना के विपणन और प्रचार के लिए क्यूसीआई को सीबीएंडएस परियोजना प्रदान की। अब तक हमने 40 पैकेज ऑफ प्रैक्टिस का संकलन किया है, 30 से अधिक संवेदीकरण कार्यशालाओं का आयोजन किया है और इसकी स्वीकृति पर विचार करने के लिए सार्क के सार्क कृषि सचिवालय को योजना प्रस्तुत की है। 

इस योजना का 12 भाषाओं में अनुवाद किया गया था और यह क्यूसीआई की वेबसाइट पर उपलब्ध है। 12 भाषाएँ असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, मलयालम, मराठी, मिज़ो, उड़िया, पंजाबी, तमिल और तेलुगु हैं।

8. यूएनएफएसएस - इंडिया  नेशनल  प्लेटफार्म  ऑन प्राइवेट  सस्टेनेबिलिटी  स्टैंडर्ड्स  (आईएनपीपीएसएस):

  • वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय और यूनाइटेड नेशन फोरम ऑन सस्टैनबिलिटी स्टैंडर्ड्स (यूएनएफएसएस) के साथ।
  • यूनाइटेड नेशन फोरम ऑन सस्टैनबिलिटी स्टैंडर्ड्स (यूएनएफएसएस) संयुक्त राष्ट्र की पांच एजेंसियों (एफएओ, आईटीसी, यूएनसीटीएडी, यूएनईपी और यूनिडो) की एक संयुक्त पहल है।
  • 2014 और 2015 में आयोजित मानक सम्मेलनों के परिणाम के रूप में यूएनएफएसएस और भारतीय गुणवत्ता परिषद (क्यूसीआई) ने प्राइवेट  सस्टेनेबिलिटी  स्टैंडर्ड्स (पीएसएस) पर राष्ट्रीय मंच की स्थापना के लिए हाथ मिलाया।
  • प्राइवेट  सस्टेनेबिलिटी  स्टैंडर्ड्स (पीएसएस) पर भारत का राष्ट्रीय मंच (इसके बाद, भारतीय पीएसएस प्लेटफॉर्म) राष्ट्रीय संदर्भ में पीएसएस मुद्दों को संबोधित करने के लिए दुनिया में अपनी तरह की पहली पहल है।
  • यह  मंच प्रकृति में बहु-हितधारक है और इसमें सरकार के सदस्य, सांविधिक एजेंसियां, निर्यात संवर्धन परिषद, कमोडिटी बोर्ड, उद्योग संघ, उद्योग, उत्पादक और उपभोक्ता शामिल हैं।
  • गुणवत्ता पर प्रचार कार्यक्रम - आईएसओ मानकों, गुणवत्ता उपकरणों और तकनीकों पर जागरूकता कार्यक्रम, गुणवत्ता संस्कृति का निर्माण
  • सस्टेनेबिलिटी  स्टैंडर्ड्स को विकसित करने के लिए प्राथमिकता वाले उत्पाद समूहों की पहचान पर एक सर्वेक्षण / अध्ययन
  • विश्व का पहला प्राइवेट सस्टेनेबिलिटी स्टैंडर्ड्स प्लेटफॉर्म, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र के साथ स्थापित किया गया | वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र के संयुक्त सहयोग से इंटरनेशनल  कन्वेंशन  ऑन  सस्टेनेबल  ट्रेड  एंड  स्टैंडर्ड्स (आईसीएसटीएस) का आयोजन किया गया | जिसमे 390+ प्रतिनिधियों, 72 वक्ताओं और 40 देशों, 8 संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने भागीदारी ली,   जिसका लाभ 8000+ हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) तक पंहुचा |
  • क्यूसीआई ने यूएनसीटीएडी, , आईटीसी के टी4एसडी, यूएन और चीन, ब्राजील, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका, फिलीपींस में राष्ट्रीय हितधारक बैठकों के मंच का प्रतिनिधित्व किया और सस्टेनेबिलिटी अध्ययन में की गई गतिविधियों का प्रदर्शन किया।

मुख्य विशेषताएं: प्राइवेट  सस्टेनेबिलिटी  स्टैंडर्ड्स से उत्पन्न होने वाले मुद्दों से को सुलझाना, 9 अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ काम करना  |

9. ग्लोबलजी.ए.पी के लिए राष्ट्रीय विवेचन:

  • ग्लोबलजी.ए.पी., कृषि उत्पादों के प्रमाणन के लिए वैश्विक मानक के स्वामी, और क्यूसीआई ने मई 2008 में एक समझौता ज्ञापन में प्रवेश किया। क्यूसीआई ने नेशनल  टेक्निकल  वर्किंग  ग्रुप  (एनटीडब्ल्यूजी) का गठन किया जो स्थानीय प्रथाओं को आंतरिक बनाने के लिए एक तंत्र हैं |
  • ग्लोबल जी.ए.पी. के संस्करण 5.3 के लिए भारत की नेशनल  इंटरप्रिटेशन (एनआई) गाइडलाइन्स, ग्लोबलजी.ए.पी.की तकनीकी समिति द्वारा स्वीकार किया गया था, जो निर्यात में, 10,000 से अधिक किसानों को लाभान्वित करने के लिए है।
  • जीआरएएसपी (सोशल  स्टैण्डर्ड  ऑफ़  ग्लोबलजी..पी.) एनआई का दस्तावेज़ीकरण भी ग्लोबलजी..पी. द्वारा अनुमोदित है।

10. सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स  मैपिंग  एंड  एनालिसिस  प्रोग्राम  (एसडीजी एमएपी)

सार्वजनिक और निजी संगठनों को ध्यान में रखकरसस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स  मैपिंग  एंड  एनालिसिस  प्रोग्राम  (एसडीजी एमएपी)’ की शुरुआत की तथा स्टैंडर्ड (जिसका मुख्य फोकस स्वैच्छिक / निजी स्थिरता मानकों पर आधारित है) का विकास किया। स्टैंडर्ड के लिए संयुक्त राष्ट्र एसडीजी का मानचित्रण, एसडीजी और उन एसडीजी के तहत प्रासंगिक लक्ष्यों को कंपनी के लिए लागू विशिष्ट व्यावसायिक कार्यों में मैप किए गए एसडीजी को औचित्य प्रदान करता है।

इसका उद्देश्य प्राथमिक एसडीजी की पहचान पर भी ध्यान केंद्रित करना है जो मानक और कंपनी के लिए सबसे अधिक प्रासंगिक हैं और जहां प्रभाव की सबसे बड़ी संभावना है। इसके बाद, प्रभाव को समझने और परिमाणित करने के लिए एक प्रभाव अध्ययन किया जाता है।

पीएडी विभाग ने एक्सपोर्ट  प्रमोशन  कौंसिल  फॉर  हैंडीक्राफ्ट्स (ईपीसीएच) के वीआरआईकेएसएच (वृक्ष) स्टैण्डर्ड के एसडीजी मैपिंग और सॉलिडेरिडाड और आईटीए के ट्रिनिटिया फ्रेमवर्क को ऑन-ग्राउंड प्रभाव का अध्ययन करके पूरा कर लिया है। क्यूसीआई ने  अवसर और सुधार के क्षेत्रों को सामने लाते हुए, वीआरआईकेएसएच (वृक्ष) स्टैण्डर्ड का प्रभाव अध्ययन भी प्रस्तुत किया।

11. बेंचमार्किंग इंडजीएपी (आईएनडीजीएपी) टू ग्लोबलजी.ए.पी.:

  • इंडजीएपी का प्रचार और विपणन हितधारकों - मुख्यतः डीओसी, एपीईडीए और मसाला बोर्ड के साथ घनिष्ठ जुड़ाव के साथ किया जाता है।
  • क्यूसीआई ने ग्लोबलजी.ए.पी.के साथ इंडजीएपी के बेंचमार्किंग प्रस्ताव के वित्तपोषण के लिए एपीईडीए के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • ग्लोबलजी..पी. विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त योजना है जिसमें अच्छी कृषि पद्धतियों (जी..पी.) के मानकों का संच है। मानक उत्पादन में अधिक दक्षता सुनिश्चित करते हैं, व्यवसाय के प्रदर्शन में सुधार करते हैं, और दुनिया भर में किसानों, खुदरा विक्रेताओं और उपभोक्ताओं को लाभान्वित करते हैं।
  • एपीईडीए ने क्यूसीआई (पी ए डी डी) को ग्लोबलजी..पी. से इंडजीएपी बेंचमार्किंग के लिए एक परियोजना प्रदान की।
  • बेंचमार्किंग के परिणामस्वरूप उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार, अच्छी कृषि पद्धतियों के बारे में जागरूकता और निर्यात के लिए लेनदेन लागत में कमी आएगी।

12. मसाला क्षेत्र में गुणवत्ता और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इंडजीएपी परियोजना का कार्यान्वयन:

  • मसाला बोर्ड (वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार) भारतीय मसालों के विकास और विश्वव्यापी प्रचार के लिए प्रमुख संगठन है।
  • मसाला क्षेत्र में इंडजीएपी परियोजना को लागू करने के अनुमोदन के लिए मसाला बोर्ड के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
  • मसाला बोर्ड ने क्यूसीआई (पी ए डी डी) को इंडजीएपी योजना के प्रचार और विपणन के लिए इंडजीएपी के कार्यान्वयन के लिए एक परियोजना प्रदान की है।
  • मसालों के लिए इंडजीएपी में परियोजना प्रमाणन से उत्पाद की गुणवत्ता में समग्र सुधार, अच्छी कृषि पद्धति के बारे में जागरूकता और निर्यात के लिए लेनदेन लागत में कमी आएगी।

13.  ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने के साथ भारत में वोलंटरी  कंस्यूमर  आर्गेनाइजेशन (वीसीओ) का अध्ययन और क्षमता बढ़ाने के लिए उनकी बेंचमार्किंग।.

14. एफएओ सार्क गैप- सार्क के देशों में मानकों का विकास और अच्छे कृषि अभ्यास (जीएपी) कार्यान्वयन और प्रमाणन के लिए योजना:

संयुक्त राष्ट्र के   फ़ूड  एंड  एग्रीकल्चर आर्गेनाईजेशन  (एफएओ) ने सभी सार्क सदस्य देशों के लिए अच्छे कृषि पद्धति (गुड  एग्रीकल्चर  प्रैक्टिस  ) पर एक गुणवत्ता बुनियादी ढांचे के विकास के लिए क्यूसीआई को अपने तकनीकी भागीदार के रूप में पहचान की हैं । यह परियोजना "सार्क के देशों में मानकों के विकास और अच्छे कृषि पद्धति (गुड  एग्रीकल्चर  प्रैक्टिस, जीएपी) के कार्यान्वयन और प्रमाणन के लिए योजना" के लिए थी। क्यूसीआई द्वारा डिजाइन और विकसित की गई योजना को संयुक्त राष्ट्र के एफएओ की सहायता से कुछ चुनिंदा सार्क देशों में स्वीकार और कार्यान्वित किया गया । सार्क  एग्रीकल्चर  सेण्टर  (एसएसी) ने इस क्षेत्र में खाद्य स्वच्छता और सुरक्षा में सुधार के लिए इस पहल को आगे बढ़ाया है।

तकनीकी जीएपी मानक, प्रमाणन निकाय मानदंड, प्रमाणन प्रक्रिया और एक्रीडेशन/अनुमोदन मानदंड वाले संपूर्ण योजना दस्तावेज एफएओ द्वारा आयोजित समापन कार्यशाला में प्रस्तुत और अनुमोदित किए गए थे।

15. क्षेत्रीय प्रशिक्षण सैक प्रशिक्षण (सार्क जीएपी):

सार्क  एग्रीकल्चर  सेण्टर  (एसएसी) ने सभी सार्क सदस्य देशों के लिए सार्क अच्छी कृषि पद्धति (सार्क गुड  एग्रीकल्चर  प्रैक्टिस, जीएपी) पर प्रशिक्षण आयोजित करने के अनुरोध के साथ क्यूसीआई से संपर्क किया। एसएसी का उद्देश्य सार्क जीएपी को अनुकूलन या अपनाने के लिए  प्रत्येक सदस्य देशों के कृषि मंत्रालय को शामिल करना है।

सदस्य देशों के साथ उपरोक्त की खोज के लिए 27-30 अगस्त, 2019 तक सार्क जीएपी पर एसएसी द्वारा क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत सरकार के कृषि आयुक्त डॉ. एस के मल्होत्रा थे।

16.योग को लोकप्रिय बनाने और विपणन में योग पेशेवरों के मूल्यांकन और प्रमाणन के लिए योजना का प्रचार:

  • माननीय प्रधान मंत्री ने योग के विशिष्ट संदर्भ में विश्वसनीय प्रणालियों के साथ भारत के पारंपरिक ज्ञान को दुनिया भर में फैलाने की इच्छा व्यक्त की थी जो दुनिया भर में योग पद्धति की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में भारत को नेतृत्व प्रदान करे। आयुष मंत्रालय ने उपरोक्त के अनुसरण में और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की घोषणा के मद्देनजर, योग पेशेवरों के स्वैच्छिक प्रमाणन की योजना विकसित करने के लिए भारतीय गुणवत्ता परिषद (क्यूसीआई) की पहचान की, यह मानते हुए कि क्यूसीआई के पास अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम पद्धतिओं पर इस तरह के गुणवत्ता ढांचे को विकसित करने में विशेषज्ञता है।
  • क्यूसीआई ने अंतरराष्ट्रीय मानक में निर्धारित सिद्धांतों और आवश्यकताओं को अपनाकर योग पेशेवर के स्वैच्छिक प्रमाणीकरण के लिए योजना  तैयार की और आयुष मंत्रालय को प्रस्तुत किए जिसका प्रमोचन  22 जून 2015 को किया गया |
  • क्यूसीआई द्वारा सफल ग्राउंडिंग के बाद योजना को आयुष मंत्रालय को सौंप दिया गया है।

17. भारतीय गुणवत्ता परिषद द्वारा योग को लोकप्रिय बनाने और विपणन में योग विद्यालय के प्रमाणन द्वारा गुणवत्ता हस्तक्षेप:

  • जून, 2015 से योग पेशेवर प्रमाणन योजना (योग  प्रोफेशनल्स सर्टिफिकेशन  स्कीम )संचालित करने के बाद, संचालन समिति ने योग विद्यालयों के प्रमाणन के लिए योजना शुरू करने का निर्णय लिया। यह योजना 28 मार्च 2016 को शुरू की गई थी।
  • इस योजना को देश के कुछ सबसे पुराने योग संस्थानों के शीर्ष योग विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार और विकसित किया गया था - जैसे कि श्री श्री रविशंकर, स्वामी रामदेव, डॉ एचआर नागेंद्र, प्रधानमंत्री के योग गुरु, कैवल्यधाम के श्री ओपी तिवारी, योग संस्थान के हंसाजी, शिवानंद स्कूल के प्रतिनिधि, ईशा फाउंडेशन, और आर्ट ऑफ लिविंग, और अन्य संगठनों से इनपुट लिए गए।
  • क्यूसीआई द्वारा सफल ग्राउंडिंग के बाद योजना को आयुष मंत्रालय को सौंप दिया गया है।

18.इंटरनेशनल  क्रॉप्स  रिसर्च  इंस्टिट्यूट  फॉर  सेमि -एरिड  ट्रॉपिक्स  (आईसीआरआईएसएटी):

डॉ. जैकलीन डी'आरोस ह्यूजेस, महानिदेशक और डॉ. रवि पी. सिंह, एसजी, क्यूसीआई द्वारा 'स्मार्ट फूड' पर प्रमाणन योजना के डिजाइन और विकास के लिए आईसीआरआईएसएटी के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

19. यूनाइटेड   नेशंस   डेवलपमेंट   प्रोग्राम (यूएनडीपी):

यूएनडीपी ने राष्ट्रीय जैव विविधता अधिनियम 2002 के अनुसार पहुंच और लाभ साझा करने की योजना के डिजाइन और विकास में उनकी मदद करने के लिए क्यूसीआई से संपर्क किया है।

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आखरी अपडेट: 28 दिसंबर 2021.