इतिहास

भारतीय गुणवत्ता परिषद (क्यूसीआई) भारतीय उद्योग के साथ साझेदारी में संगठन स्थापित करने में भारत सरकार का अग्रणी प्रयोग है।

पृष्ठभूमि

वर्ष 1992 से देश में एक्रेडिटेशन बॉडी (मान्यता निकाय) की स्थापना की आवश्यकता महसूस की जा रही थी ताकि अनुरूपता मूल्यांकन परिणामों की मान्यता के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य तंत्र स्थापित किया जा सके। प्रयोगशालाओं के संबंध में, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत एक एक्रेडिटेशन बॉडी पहले से ही कार्यरत थी। उपयुक्त सिफारिशें करने के लिए उद्योगों सहित विभिन्न इच्छुक मंत्रालयों और हितधारकों को शामिल करने वाली एक समिति की स्थापना की गई थी। कार्य का समन्वय तत्कालीन औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग - डीआईपीपी (अब "उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग" - डीपीआईआईटी) द्वारा किया गया था और सिफारिशें 1996 में कैबिनेट को प्रस्तुत की गईं। प्रमुख सिफारिशों में "सरकार और उद्योग द्वारा संयुक्त रूप से एक संगठन की स्थापना की आवश्यकता" और "संगठन के आत्मनिर्भर और सरकार से दूर रहने की आवश्यकता" शामिल थी।

सिफारिशों को स्वीकार करते हुए, कैबिनेट कमेटी ने 1860 के सोसायटी पंजीकरण अधिनियम XXI के तहत देश में एक्रेडिटेशन संरचना स्थापित करने और भारत में गुणवत्ता आंदोलन प्रसारित करने के लिए राष्ट्रीय गुणवत्ता अभियान चलाते हुए भारतीय गुणवत्ता परिषद की स्थापना करने का निर्णय लिया।

भारतीय गुणवत्ता परिषद की स्थापना के बाद से अध्यक्ष:

श्री रतन एन. टाटा 1997 - 1999
श्री वेणु श्रीनिवासन 1999 – 2001
डॉ. आर. ए. माशेलकर 2001 – 2007
श्री अजय शंकर 2007 – 2010
श्री अरुण मैरा 2010 – 2013 (सितंबर)
श्री सौरभ चंद्रा 2013 (अक्टूबर 2013) – 2014 (फरवरी)
श्री अमिताभ कांत 2014 (मार्च) – 2014 (सितंबर)
श्री आदिल ज़ैनुलभाई 2014 (सितंबर) से आज तक

 

स्थापना के बाद से भारतीय गुणवत्ता परिषद के महासचिव:

श्री विजय कुमार मेदिरत्ता 18 अक्टूबर 1998 से 14 नवंबर 2003
डॉ गिरधर जे. ज्ञानी 3 दिसंबर 2003 से 21 मई 2012
श्री बी वेंकटरमण 22 मई 2013 से 31 अगस्त 2014 तक
डॉ. रवि पी. सिंह 29 सितंबर 2014 से अब तक
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आखरी अपडेट: 10अगस्त 2022.