लीडरशिप – बोर्ड/डिवीज़न

एन ए बी सी बी

श्री दीप कपूरिया, चेयरपर्सन

श्री दीप कपूरिया हाई-टेक ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन हैं। इस समूह में द हाई-टेक गियर्स लिमिटेड, द हाई-टेक इंजीनियरिंग सिस्टम्स, द हाई-टेक ई-सॉफ्ट और द हाई-टेक रोबोटिक सिस्टम्ज़ शामिल हैं। हाई-टेक गियर्स की निर्माण सुविधाएं कनाडा और अमेरिका में भी मौजूद हैं।

इस समूह का कामकाज उत्पादों और सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला तक फैला हुआ है। मैन्युफैक्चरिंग में पॉवरट्रेन कॉम्पोनेंट, मोबाइल रोबोट (औद्योगिक और रक्षा क्षेत्र), एडीएएस (एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम) शामिल हैं। सेवाओं में हाई-एंड इंजीनियरिंग, एआई, सिस्टम डिजाइन आदि शामिल हैं।

श्री कपूरिया 'ग्लोबल इनोवेशन एंड टेक्निकल एलायंस (जी आई टी ए) के चेयरमैन भी हैं, जो एक सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) कंपनी है, जिसे प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टी डी बी), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डी एस टी), भारत सरकार और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा संयुक्त रूप से बढ़ावा दिया गया है।

पिछले दो दशकों में, श्री कपूरिया ने उद्योग, उद्योग संघों और सरकारी निकायों में प्रमुख पदों पर काम किया है।

उन्हें विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यू टी ओ) की विभिन्न मंत्री स्तरीय और द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं में नीति निर्धारकों का सहयोग करने के लिए उद्योग का नेतृत्व करने का सौभाग्य मिला है।

वे एक दशक से अधिक समय से बी-20 के "व्यापार और निवेश" टास्क फोर्स के सदस्य रहे हैं।

वे हाल ही में बी-20 अर्जेंटीना में "डिजिटल इकोनोमी एंड इंडस्ट्री 4.0" पर टास्क फोर्स के सह-चेयरमैन रहे। वे मेक-इन-इंडिया, स्किल काउंसिल, एम एस एम ई मिनिस्ट्री टास्क फोर्स, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, नेशनल मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी पर उच्च स्तरीय समिति आदि सहित विभिन्न सरकारी समितियों में एक गैर-सरकारी सदस्य रहे हैं।

वर्तमान में श्री कपूरिया सी आई आई राष्ट्रीय डिजाइन समिति के चेयरमैन, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नीति पर सीआईआई की नेशनल काउंसिल के सह-चेयरमैन और मध्य यूरोप पर सी आई आई की क्षेत्रीय समिति के अध्यक्ष हैं।

श्री कपूरिया 'ऑटो कॉम्पोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ए सी एम ए)’ के पूर्व प्रेसिडेंट भी हैं। वे एसीएमए सेंटर ऑफ टेक्नोलॉजी (ए सी टी) सहित सेक्टोरल एसोसिएशन के लिए विभिन्न समितियों के अध्यक्ष भी रहे।

श्री दीप कपूरिया ने मेयो कॉलेज, अजमेर से पढ़ाई की है और बीआईटीएस, पिलानी से इंजीनियरिंग में स्नातक किया है। वे अमेरिका के हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के पूर्व छात्र रहे हैं।


श्री राजेश माहेश्वरी, सीईओ

श्री माहेश्वरी ने रसायन विज्ञान और एमबीए में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की है; उनके पास गुणवत्ता मूल्यांकन/प्रबंधन, औद्योगिक निर्माण के साथ-साथ मानकों, तकनीकी विनियमों, मान्यता और अनुकूलता मूल्यांकन में करीब तीन दशकों का अनुभव है। वे 1999 से भारत में एन ए बी एल और एक्रेडिटेशन सिस्टमों के शुरुआती वर्षों से एक्रेडिटेशन के क्षेत्र में काम कर रहे हैं; वे अन्य एक्रेडिटेशन संस्थाओं के समकक्षों का मूल्यांकन करने के लिए एपीएसी समकक्ष मूल्यांकनकर्ता भी हैं।

श्री माहेश्वरी 2012 में एन ए बी सी बी में से जुड़े और उन्हें नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर सर्टिफिकेशन बॉडीज़ (एन ए बी सी बी) के इंस्पेक्शन बॉडी एक्रेडिटेशन प्रोग्राम के प्रबंधन की जिम्मेदारी मिली। बाद में, उन्हें भारतीय गुणवत्ता परिषद (क्यूसीआई) के निदेशक (प्रोजेक्ट नियोजन एवं कार्यान्वयन डिवीजन) के रूप में पदोन्नत किया गया, जिसमें वे क्यूसीआई द्वारा विशेष रूप से सरकार के लिए पूरे किये जा रहे विभिन्न प्रोजेक्ट की परिकल्पना, नियोजन और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने पहले नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग ऐंड कैलिब्रेशन लैबोरेट्रीज (एन ए बी एल) और उसके बाद एक दशक से अधिक समय तक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के तहत (एन ए बी एल) के टेस्टिंग ऐंड मेडिकल लैबोरेटरी एक्रेडिटेशन प्रोग्राम के प्रबंधन का काम किया है। इससे पहले, उन्होंने करीब एक दशक तक स्पेशियलिटी केमिकल्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में काम किया था।


एन ए बी ई टी

श्री पी. आर. मेहता, चेयरपर्सन

श्री प्रेमेन्द्र राज मेहता वास्तुकला परिषद्, भारत के पूर्व अध्यक्ष हैं। वास्तुकला परिषद्, वास्तुविद् अधिनियम, 1972 के प्रावधान के अधीन भारत सरकार द्वारा निर्मित एक सांविधिक निकाय है। इसे वास्तुविदों के पंजीकरण के अलावा, वास्तुविद् शिक्षा एवं अभ्यास के मानकों को विनियमित करने की जिम्मेदारी प्रदान की गई है। श्री मेहता वर्तमान में भारत सरकार के सभी के लिए आवास मिशन के प्रौद्योगिकी उप मिशन के सदस्य हैं।

श्री मेहता केन्द्रीय भवन अनुसंधान संस्थान, रुड़की (सीएसआईआर-सीबीआरआई) तथा ललित कला अकादमी के अनुसंधान परिषद के पूर्व सदस्य हैं और एआईसीटीई के अखिल भारतीय वास्तुकला, नगर योजना एवं अनुप्रयुक्त कला शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष हैं। श्री मेहता राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड, शिक्षा मंत्रालय की गेट समिति और भारत में उच्च शिक्षा के विकास से संबंधित कई अन्य मंचों के सदस्य रहे हैं। साथ ही वह सेवाओं पर वाणिज्य मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति के सदस्य भी रह चुके हैं।

श्री मेहता ने विश्व व्यापार संगठन में भारत का प्रतिनिधित्व किया है और पेशेवरों के लिए बाजार में पहुंच विषयक कई द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय वार्ताओं में भाग लिया है। इन्होंने विश्व व्यापार संगठन, जिनेवा में योग्यता की मान्यता विषय पर एक पेपर भी प्रस्तुत किया है। साथ ही वास्तुकला शिक्षा, उच्च शिक्षा, शहरी डिजाइन एवं शहरी प्रबंधन, सेवाओं में व्यापार पर सामान्य समझौते, पेशेवर व्यवहार आदि विषय पर कई राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार प्रस्तुत किए हैं।

व्यापक रूप से यात्रा करने वाले श्री मेहता अपने कार्य में 1979 से सक्रिय हैं और वे कनॉट प्लेस, नई दिल्ली के पुनर्विकास के वास्तुकार हैं। शहरी डिजाइन में स्नातकोत्तर की योग्यता रखने वाले श्री मेहता स्कूल ऑफ प्लानिंग ऐंड आर्किटेक्चर, नई दिल्ली के पूर्व छात्र हैं। वे दो दशकों से अधिक समय तक अल्मा मेटर में विजिटिंग प्रोफेसर रहे हैं।

श्री मेहता, जयपुर फुट के लिए प्रसिद्ध भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति (बीएमवीएसएस) के निदेशक भी हैं। विश्व में दो मिलियन से अधिक दिव्यांग व्यक्ति बीएमवीएसएस द्वारा निःशुल्क प्रदान किए जाने वाले सहायक उपकरणों के लाभार्थी हैं। श्री मेहता को दिव्यांगों की सेवा के लिए हेलेन केलर पुरस्कार प्रदान किया गया है।


डॉ. मनीष कुमार, सीईओ

डॉ. मनीष कुमार नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर एजुकेशन ऐंड ट्रेनिंग (एन ए बी ई टी), भारतीय गुणवत्ता परिषद (क्यूसीआई), नई दिल्ली में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में कार्यरत हैं। वे इंजीनियरिंग, कानून और प्रबंधन में स्नातकोत्तर हैं। उन्होंने विभिन्न पदों में 26 वर्षों तक सेवा की है। उन्होंने हरियाणा सरकार के तकनीकी शिक्षा विभाग में फैकल्टी के रूप में अपना करियर शुरू किया और बाद में हरियाणा के राज्य तकनीकी शिक्षा बोर्ड में संयुक्त सचिव; सहायक निदेशक एआईसीटीई; संयुक्त सचिव सीबीएसई; रजिस्ट्रार, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, हमीरपुर और मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर, स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ विजुअल एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स, रोहतक, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), चंडीगढ़, नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर एजुकेशन ऐंड ट्रेनिंग (एन ए बी ई टी), भारतीय गुणवत्ता परिषद (क्यूसीआई) का एक सांविधिक बोर्ड, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (एमओसीआई), भारत सरकार द्वारा गठित एक स्वायत्त निकाय के रूप में कार्य किया। डीआईपीपी, क्यूसीआई के लिए नोडल मंत्रालय है।
एन ए बी ई टी के 4 प्रभाग हैं: औपचारिक शिक्षा उत्कृष्टता प्रभाग (एफ़ईईडी), पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए), लीन विनिर्माण और कौशल प्रशिक्षण एवं प्रमाणन (एसटीसी)


एन ए बी एच

पद्म श्री प्रो. (डॉ.) महेश वर्मा , अध्यक्ष 

अस्पताल और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएच) के अध्यक्ष डॉ महेश वर्मा को उनके रोगी-अनुकूल दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। उन्हें दंत शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित किया गया है और वे पद्म श्री पुरस्कार विजेता, डॉ बी सी रॉय पुरस्कार विजेता और राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी पुरस्कार विजेता हैं। वह वर्तमान में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति और प्रोफेसर एमेरिटस मौलाना आजाद दंत चिकित्सा विज्ञान संस्थान हैं। वह इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर डिसएबिलिटी एंड ओरल हेल्थ (iADH) इंडिया चैप्टर और इंडियन एकेडमी ऑफ रिस्टोरेटिव डेंटिस्ट्री (IARD) के अध्यक्ष हैं। वह इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर डेंटल रिसर्च (IADR) इंडिया डिवीजन और इंडियन सोसाइटी फॉर डेंटल रिसर्च के अध्यक्ष-चुनाव भी हैं।

डॉ. अतुल मोहन कोचर, सीईओ

डॉ. अतुल मोहन कोचर ने प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय से एमबीबीएस और एमडी (त्वचा विज्ञान) की डिग्री हासिल की है। उन्हें त्वचाविज्ञान, वेनेरोलॉजी और कुष्ठ रोग के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। वे नेशनल बोर्ड (डीएनबी- डर्मेटोलॉजी एंड वेनेरोलॉजी) के डिप्लोमेट, नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज के सदस्य और अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी के फेलो भी हैं।

उन्होंने 2003 से लोक नायक अस्पताल और मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली के त्वचा विज्ञान और एसटीडी विभाग में प्रोफेसर और सलाहकार के रूप में काम किया है।

इन वर्षों में उन्होंने विभिन्न संगठनात्मक पदों पर अर्थात आईएडीवीएल–दिल्ली राज्य शाखा के प्रेसिडेंट, सचिव, वाइस प्रेसिडेंट और कार्यकारी सदस्य के रूप में कार्य किया है। उन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर आईएडीवीएल के विभिन्न सम्मेलनों को आयोजक सचिव के रूप में सफलतापूर्वक आयोजित किया है। उन्हें वर्ष 2015 के लिए प्रतिष्ठित सरदारी लाल मेमोरियल अवार्ड सहित राज्य और राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न पुरस्कार मिले हैं। वे सोसायटी फॉर पीडियाट्रिक डर्मेटोलॉजी के मौजूदा प्रेसिडेंट और साइंटिफिक कॉस्मेटोलॉजिकल सोसायटी के संस्थापक सचिव हैं। उनके नाम 70 से अधिक प्रकाशनों, 4 पुस्तकों, कई अध्यायों और मल्टीमीडिया से जुड़े हैं।

स्वास्थ्य सेवा में गुणवत्ता लाने के लिए प्रयासरत, एक सक्रिय चिकित्सक और 2016 से एन ए बी एच के साथ एक प्रिंसिपल एसेसर के रूप में जुड़े, डॉ. अतुल मोहन ने दिसंबर 2019 से भारत के नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल ऐंड हेल्थ केयर प्रोवाइडर्स (एन ए बी एच) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में कार्यभार संभाला है। गुणवत्ता पर ध्यान देना, मरीज की सुरक्षा को बढ़ावा देना और 'गरीबों में सबसे गरीब' तक सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवा को पहुंचाना उनके जीवन का मिशन है।


एन ए बी एल

डॉ. आर के कोटनाला, चेयरपर्सन


डॉ. कोटनाला को वैज्ञानिक के रूप में 35 वर्षों का अनुभव है और वे वर्तमान में एनपीएल में राजा रमन्ना फेलो हैं। वे पर्यावरण विज्ञान एवं बायोमेडिकल मेट्रोलॉजी डिवीजन; राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला के मैटीरियल इंजीनियरिंग और भौतिकी प्रभाग के मुख्य वैज्ञानिक (पूर्व) और प्रमुख (पूर्व) भी रहे हैं। फेलो नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज इंडिया; एनएएसआई
और आईजीयू में वैज्ञानिक के रूप में 35 वर्ष के अनुभव के साथ, वे वर्तमान में राजा रमन्ना फेलो के रूप में, इंडियन न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेट्री (आईएनओ) पर चुंबकीय मापों के सलाहकार हैं; यह 15 अरब रुपये की लागत वाला एक विशाल बहुराष्ट्रीय प्रोजेक्ट है जो सीईआरएन न्यूट्रिनो प्रोजेक्ट से 4 गुना बड़ा है। राजा रमन्ना फेलो, परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा किसी वैज्ञानिक को दिए जाने वाले सर्वोच्च प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक है। डॉ. कोटनाला पर्यावरण विज्ञान एवं बायोमेडिकल मेट्रोलॉजी और मैटीरियल इंजीनियरिंग एवं भौतिकी, राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला के मुख्य वैज्ञानिक और डिविजनल हेड के पदों पर भी कार्यरत रहे हैं।
डॉ. कोटनाला ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, आईआईटी दिल्ली से सिलिकॉन सोलर सेल पर पीएचडी हासिल की है। उन्होंने 132 से अधिक उद्योगों के साथ करीबी बातचीत करके उन्हें पूरा सहयोग और आईएसओ: 17025 गुणवत्ता प्रणाली पर आधारित औद्योगिक समाधान प्रदान किया। उन्होंने 19 विश्वविद्यालयों और 8 आईआईटी के साथ बातचीत की। एससीआई पीयर रिव्यू जर्नलों में 491 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किये। 2019 में ही 12 अमेरिकी/भारतीय पेटेंट, 11 औद्योगिक परामर्श, 4 पुस्तकों और अंतर्राष्ट्रीय पुस्तकों में 8 अध्यायों के अलावा 1210 से अधिक जगहों पर उनका हवाला दिया गया। वर्ष 2020 में, केवल 5 महीनों में 800 बार उनका ज़िक्र किया गया।
शोधकार्य संबंधी रुचियां: पर्यावरण विज्ञान, जलविद्युत सेल, सौर सेल, मेट्रोलॉजी, स्पिंट्रोनिक, मल्टीफेरोइक्स, माइक्रोवेव ऐब्ज़ोर्प्टिव, नैनो-फेराइट और ह्यूमिडिटी सेंसर। उन्होंने 491 दस्तावेज़ प्रकाशित किए हैं, जिनमें फिजिकल रिव्यू लेटर, 2008, पीआरबी 2009, एंजवेन्टे केमी इंट 2012, मैट साइंस ए जर्नल, सेंसर्स एंड एक्चुएटर्स केम बी, नैनोस्केल, हाइड्रोजन एनर्जी का इंटरनेशनल जर्नल, एनर्जी रिसर्च, अक्षय ऊर्जा, ऊर्जा और ईंधन, सोलर सेल मैटीरियल्स, एसीएस एप्लाइड मैटीरियल्स एंड इंटरफेसेस के इंटरनेशनल जर्नल, फिजिकल केमिस्ट्री सी जर्नल, एप्लाइड फिजिक्स लेटर, एप्लाइड फ़िजिक्स जर्नल, अलॉयज ऐंड कंपाउंड्स जर्नल आदि शामिल हैं।
पुरस्कार: यूबीएम, आरईआई अवार्ड 2018, एशिया के सबसे बड़े अक्षय ऊर्जा सम्मेलन के आयोजक द्वारा अक्षय ऊर्जा भारत के प्राप्तकर्ता। फेलो नेशनल साइंस एकेडमी ऑफ साइंसेज, भारत 2015; उत्कृष्ट शिक्षाविद की मान्यता 2013-एपीएएम, एशिया पैसिफिक एकेडमी ऑफ मैटीरियल्स, ऑफिस ऑफ नेवल रिसर्च (ओएनआर), वाशिंगटन, यूएसए ने 2011 में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सेंसर तैयार करने के लिए मल्टीफेरोइक्स पर एक प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट से सम्मानित किया। एमआरएसआई मेडल अवार्ड 2008, जेएसपीएस जापान विजिटिंग साइंटिस्ट 1989-90 और अन्य पुरस्कार।
 

श्री एन वेंकटेस्वरन, सीईओ

श्री एन वेंकटेस्वरन ने मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (बीई) और बीआईटीएस पिलानी से गुणवत्ता प्रबंधन में मास्टर ऑफ साइंस (एम.एस.) की डिग्री हासिल की है।
श्री वेंकटेस्वरन को उद्योग में 9 वर्ष और एन ए बी एल में 16 वर्षों के साथ करीब 25 वर्षों तक कार्य करने का अनुभव है।
श्री वेंकटेस्वरन आईएसओ डब्ल्यूजी 44, आईएसओ डब्यूजी 56, आईएसओ डब्यूजी 57, आईएसओ टीसी 212 आदि जैसी कई अंतरराष्ट्रीय समितियों के सदस्य हैं। वे एपीएसी क्षेत्र में एपीएससी पीटी कमिटी, तकनीकी समिति आदि के सदस्य और आईएलएसी क्षेत्र में आईएलएसी एक्रेडिटेशन कमिटी, व्यवस्था समिति, प्रयोगशाला समिति आदि के सदस्य भी हैं।
श्री वेंकटेस्वरन भारत में आईएसओ/आईईसी 17011, आईएसओ/आईईसी 17025, आईएसओ/आईईसी 17043 और आईएसओ/आईईसी 17034 मानकों के लिए एक प्रतिष्ठित फैकल्टी हैं और उन्होंने इस विषय पर कई प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए हैं।
श्री वेंकटेस्वरन ने भारत में प्रयोगशाला सम्मेलन और पीटीपी/आरएमपी सम्मेलन की अवधारणा की शुरुआत की है। श्री वेंकटेश्वरन ने लीड एसेसर के रूप में कई एन ए बी एल ऑडिट किए हैं। वे एक एपीएसी मूल्यांकनकर्ता हैं और उन्होंने अन्य अर्थव्यवस्थाओं में एक्रेडिटेशन निकायों के मूल्यांकन में भी हिस्सा लिया है।
श्री वेंकटेस्वरन को 31 मई, 2019 से मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टींग ऐंड कैलिब्रेशन लैबोरेट्रीज (एन ए बी एल) नियुक्त किया गया है।


एन बी क्यू पी

श्री सुनील माथुर, चेयरपर्सन

सुनील माथुर 2014 से सीमेंस लिमिटेड, भारत के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। इस भूमिका में, वे दक्षिण एशिया में सीमेंस की देखभाल के लिए उत्तरदायी हैं। वे वर्तमान में सीमेंस की ग्लोबल लीडरशिप टीम के सदस्य और भारत में सीमेंस हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड के बोर्ड के सदस्य हैं। वे भारत में सीमेंस गमेसा रिन्यूएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड के बोर्ड के चेयरमैन भी हैं। 2008 से 2014 तक वे सीमेंस लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक और मुख्य वित्तीय अधिकारी रहे और उनके पास दक्षिण एशिया की भी जिम्मेदारी थी। सीमेंस लिमिटेड के मुख्य वित्तीय अधिकारी के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, वे ग्लोबल फाइनेंस मैनेजमेंट टीम के सदस्य रहे। वे जर्मनी में कई वरिष्ठ प्रबंधन पदों पर कार्य करते हुए 30 से अधिक वर्षों तक सीमेंस के साथ रहे, जहां उन्होंने कंपनी के इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन डिवीजन में एक ग्लोबल बिजनेस यूनिट के मुख्य वित्तीय अधिकारी के रूप में बिजली उत्पादन प्रभाग में काम किया। उन्होंने भारत के अलावा जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका में काम किया है। सुनील माथुर भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फ़िक्की) की राष्ट्रीय परिषदों में शामिल हैं। इसके अलावा, वे सीआईआई स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग काउंसिल के चेयरमैन और सीआईआई पश्चिमी क्षेत्र के चेयरमैन भी हैं। वे इंडो-जर्मन चैंबर ऑफ कॉमर्स और बॉम्बे चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के पूर्व प्रेसिडेंट रह चुके हैं।

 

श्री सी के विश्वास, सीईओ

चंपक कुमार विश्वास, अप्रैल 2015 से एन बी क्यू पी बोर्ड (क्यूसीआई का एक घटक बोर्ड) के सीईओ हैं। 1985 बैच के बी.टेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग स्नातक के पास सिस्टम/प्रोसेस/उत्पाद/सेवाएं/निर्यात गुणवत्ता, टीक्यूएम/व्यापार उत्कृष्टता, संसाधन/ऊर्जा संरक्षण सहित पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली, मुख्य रूप से मोटर वाहन क्षेत्र, एफएमसीजी और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के साथ-साथ आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, गुणवत्ता प्रबंधन के क्षेत्र में 30 से अधिक वर्षों का कार्य अनुभव है।

उन्हें ओईएम और उसके सहयोगियों में सिस्टम, प्रक्रियाओं, निरीक्षण के मानक तैयार करने और ऑडिट, प्रशिक्षण आदि कराने करने का समग्र अनुभव है। उन्होंने मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और अन्य बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ दो दशकों के ज़बरदस्त अनुभव से जापानी उद्योगों की सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप एक गुणवत्ता संस्कृति तैयार करने की दिशा में एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाया। वे जागरूकता/प्रशिक्षण कार्यक्रमों, गुणवत्ता सुधार प्रोजेक्ट, पुरस्कार योजनाओं, प्रकाशनों और गुणवत्ता सम्मेलन और प्रतियोगिता जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से पूरे भारत में, एमएसएमई सहित सभी क्षेत्रों में गुणवत्ता की अवधारणाओं को बढ़ावा देने के लिए एन बी क्यू पी में गुणवत्ता के प्रति उत्साही लोगों की एक युवा टीम का नेतृत्व कर रहे हैं।

 


पैड - पी ए डी डी

डॉ. मनीष पांडे, निदेशक और प्रमुख

डॉ. मनीष पांडे क्यूसीआई में पीएडी डिवीजन के प्रमुख हैं। वे निजी स्थिरता मानकों पर भारतीय राष्ट्रीय प्लैटफ़ॉर्म, वोलंटरी सर्टिफिकेशन स्कीम फ़ॉर मेडिकल प्लांट प्रोड्यूस (वीसीएसएमपीपी), राष्ट्रीय जीएलपी सेल (राष्ट्रीय जीएलपी अनुपालन निगरानी प्राधिकरण – एनजीसीएमए के साथ) आदि के साथ-साथ क्यूसीआई के तहत प्रबंधित कई अन्य स्वैच्छिक योजना जैसे प्रमुख सरकारी और अंतर-सरकारी प्रयासों का नेतृत्व करते हैं। वे योगा पेशेवर प्रमाणन योजना के अंतर्राष्ट्रीय कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार थे। अनुकूलता मूल्यांकन के क्षेत्र में 20 से अधिक वर्षों के प्रगतिशील अनुभव के साथ, वे विभिन्न निजी, स्वैच्छिक और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के डिजाइन और कार्यान्वयन के साथ-साथ कई उद्योग संघों, सरकारी और अंतर-सरकारी संस्थाओं के साथ तकनीकी सहयोग, सहायता प्रदान करने और हितधारक प्रबंधन लिए भी जिम्मेदार हैं।

डॉ. पांडे भारत सरकार और उसकी सहयोगी संस्थाओं द्वारा संचालित विभिन्न तकनीकी समितियों और योजनाओं के कार्यकारी समूहों के विशेषज्ञ सदस्य हैं। उन्होंने एनपीओपी (भारत), एनओपी (यूएसडीए - यूएसए), ईयू के अनुसार जैविक जैसे कृषि आधारित मानकों; गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिसेस (जीएपी), राउंड टेबल ऑन रिस्पोंसिबल सॉय ऐंड फोरेस्ट्री स्टैंडर्ड जैसे कि एफएससी और पीईएफसी के लिए कई ऑडिट किए हैं। अतीत में, उन्होंने वर्ल्डवाइड फंड (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ़) फ़ॉर नेचर – भारत, एसजीएस – एक स्विस आधारित एमएनसी, के अलावा अंकटाड, एफ़एओ और सार्क के साथ स्वतंत्र सलाहकार के रूप में काम किया है। उन्होंने वन अनुसंधान संस्थान से वानिकी में पीएच.डी. और वानिकी में स्नातकोत्तर के लिए स्वर्ण पदक हासिल किया है।


पी पी आई डी

श्री सुब्रतो घोष, वरिष्ठ सलाहकार (प्रभारी पीपीआईडी)

 

 

जेड (जेडईडी)

डॉ. ए. राज, वरिष्ठ निदेशक और प्रमुख

डॉ. ए. राज 2015 से भारतीय गुणवत्ता परिषद में कार्यरत हैं और वर्तमान में जेडईडी डिवीजन के एक वरिष्ठ निदेशक और प्रमुख के रूप में नियुक्त हैं। वे युवा पेशेवरों और विशेषज्ञों की एक टीम का नेतृत्व करते हैं।

राज का पेशेवर करियर अट्ठाईस वर्षों से अधिक का है और उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से पीएचडी, पंजाब तकनीकी विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर, दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और एनसीएचएमसीटी से स्नातक डिप्लोमा हासिल किया है।

उन्होंने भारत में प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आतिथ्य संगठनों और विश्वविद्यालयों के साथ काम किया है। उनके पास आतिथ्य प्रबंधन, नियोजन और प्रशासन, व्यवसाय प्रबंधन और शिक्षण एवं विकास के क्षेत्र में काम करने का अनुभव है।

राज ने कई अंतरराष्ट्रीय प्लैटफ़ॉर्मों और फ़ोरमों पर क्यूसीआई का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने अन्य संस्थाओं के साथ-साथ एएसक्यू (टेक्सास, यूएसए), एआरएसओ (दक्षिण अफ्रीका, इथियोपिया, केन्या, बुर्किना फासो), ईओक्यू (स्लोवेनिया और पुर्तगाल), आईसीक्यूईएम (स्पेन), सीएसक्यू (कनाडा) में दस्तावेज़ प्रस्तुत किए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर, राज ने विभिन्न फ़ोरमों और पैनल चर्चाओं में क्यूसीआई की पहलों को प्रस्तुत और प्रदर्शित किया है, जिनमें भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के तहत जेडईडी पर भारत के बैंकरों की क्षमता वृद्धि की पहल के अलावा विभिन्न राज्य सरकारों के सम्मेलन, निवेश समिट, उद्योग के इवेंट, प्रतिष्ठित नेशनल इंडस्ट्री चेंबर जैसे सीआईआई, फिक्की आदि के साथ-साथ बड़े उद्यमों और ओईएम की आपूर्ति श्रृंखला बैठकें शामिल हैं।

राज एक उत्साही प्रशिक्षक भी हैं। वे प्रशिक्षण और विकास गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। इसे बढ़ाने के लिए, उन्होंने अन्य कार्यक्रमों के साथ-साथ पर्यटन मंत्रालय की “साथी” (SAATHI) पहल के तहत आतिथ्य उद्योग के लिए और क्यूसीआई की “वाश” (WASH) योजना के तहत कई क्षेत्रों के लिए विभिन्न क्षमता विकास कार्यक्रम/वेबिनार आयोजित किए हैं।
 


टीसीबी

श्री आलोक जैन, निदेशक एवं प्रमुख

श्री आलोक जैन अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से औद्योगिक इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर के साथ मैकेनिकल इंजीनियर हैं। गुणवत्ता नियंत्रण, गुणवत्ता प्रबंधन, टीक्यूएम, प्रशिक्षण और क्षमता विकास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध आदि में 25 से अधिक वर्षों के अनुभव के साथ, उन्हें एपीएलएसी (अब एशिया पैसिफिक एक्रेडिटेशन कोऑपरेशन), एएफआरएसी (अफ्रीकन एक्रेडिटेशन कोऑपरेशन), एआरएसी (अरब एक्रेडिटेशन कोऑपरेशन), एसएडीसीए (साउथ अफ्रीकन डेवलपमेंट कम्युनिटी कोऑपरेशन इन एक्रेडिटेशन), आईएएफ़ (इंटरनेशनल एक्रेडिटेशन फोरम) और आईएलएसी (इंटरनेशनल एक्रेडिटेशन कोऑपरेशन) जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ एक मूल्यांकनकर्ता के तौर पर पैनल में शामिल किया गया है।) उन्होंने फिलीपींस, कोरिया, थाईलैंड, अमेरिका, मलेशिया, न्यूजीलैंड, जापान, चीन, रूस, किर्गिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात, अल्जीरिया, बोत्सवाना, मॉरीशस आदि के एक्रेडिटेशन निकायों का मूल्यांकन किया है।

मान्यता (एक्रेडिटेशन) के क्षेत्र में उनकी सक्षमता के दायरे में आईएसओ/आईईसी 17011, आईएसओ/आईईसी 17025, आईएसओ/आईईसी 17020, आईएसओ/आईईसी 17021, आईएसओ/आईईसी 17043, आईएसओ/आईईसी 17065 आदि शामिल हैं।

अपने कौशल प्रदर्शनों की सूची में, उन्होंने इथियोपिया, सऊदी अरब साम्राज्य, कतर, ईरान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार में आईएसओ 15189 सहित मान्यता के विभिन्न मानकों पर विश्व बैंक, यूनिडो, पीटीबी आदि की सहायता से विभिन्न क्षमता विकास और प्रचार गतिविधियों का निर्देशन किया है। इसके अलावा, उन्होंने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बैठकों में एक्रेडिटेशन के क्षेत्र में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

प्रशिक्षण और क्षमता (टीसीबी) प्रकोष्ठ के प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी लेने से पहले, श्री जैन ने ऑटोमोटिव क्षेत्र में काफी समय बिताने के बाद करीब 20 वर्षों तक क्यूसीआई बोर्ड 'एन ए बी एल' के साथ काम किया है, जहां वे संपूर्ण गुणवत्ता प्रबंधन (टीक्यूएम), सिक्स सिग्मा, गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली, उत्पाद प्रमाणन आदि से संबंधित कार्यों को पूरा करने के लिए उत्तरदायी थे।


आरएसीबी

श्री सुनील के. मिश्रा, संयुक्त निदेशक एवं प्रमुख

डॉ. एस. के. मिश्रा वर्तमान में भारतीय गुणवत्ता परिषद में प्रमुख (अनुसंधान एवं क्षमता विकास डिवीजन) के पद पर कार्यरत हैं। डॉ मिश्रा ने आईआईटी बीएचयू से मैटीरियल्स टेक्नोलॉजी में अपनी पीएच.डी. हासिल की है और उनके पास उद्योग, निजी विश्वविद्यालय से लेकर केंद्रीय विश्वविद्यालय की सेवाओं तक कई विषयों से जुड़े क्षेत्रों में काम करने का 24 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने शिबौरा मेक्ट्रोनिक्स, फ़ूजी फिल्म्स और हिताची, जापान द्वारा हाई-टेक निर्माण और अनुसंधान उपकरणों पर विशेष अनुसंधान प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उन्होंने जर्नलों के संपादन और प्रकाशन के साथ-साथ नई टेक्नोलॉजी, शैक्षणिक और अनुसंधान कार्यक्रम, इन्क्यूबेशन, अनुसंधान केंद्र, आंतरिक अनुसंधान एवं विकास मान्यता, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, फैकल्टी डेवलपमेंट, कार्यशालाओं, सम्मेलनों, एमओयू के तहत सहयोगी अनुसंधान के डिजाइन और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने एक संपादक/लेखक के रूप में कार्यवाही, शोध पत्र, पेटेंट और पुस्तकें भी लिखी हैं। डॉ. मिश्रा के नाम 7 पेटेंट, अंतर्राष्ट्रीय जर्नलों में और सम्मेलनों की कार्यवाही से जुड़े 100 से अधिक शोध पत्र हैं। उनके पास एच-इंडेक्स 15 के साथ एक हजार से अधिक शोध उद्धरण हैं। उन्होंने 21 छात्रों को उनकी पीएचडी, एम.टेक. और बी टेक के लिए मार्गदर्शन दिया है। वे दो पुस्तकों, कई रिपोर्टों और लेखों के साथ-साथ एक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लेखक भी हैं। उन्होंने कई आमंत्रित वार्ताओं में अपने विचार रखे हैं। वे छह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नलों के समीक्षक भी हैं। उन्हें टीईपीपी इनोवेटर, आर एंड डी उत्कृष्टता पुरस्कार, एमएसएमई इनक्यूबेटी और आईसीडीडी (इंटरनेशनल सेंटर फॉर डिफ्रैक्शन डेटा), यूएसए द्वारा पाउडर डिफ्रैक्शन फ़ाइल के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया है। उन्होंने विभिन्न एजेंसियों द्वारा वित्तपोषित, उच्च मूल्य वाले सात अनुसंधान प्रोजेक्ट की जांच की है और दो परामर्श प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया है।

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आखरी अपडेट: 10अगस्त 2022.